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Famous Temple in Uttarakhand

Famous Temple in Uttarakhand – देवभूमि के सबसे दिव्य और प्रसिद्ध मंदिर

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Famous Temple in Uttarakhand – देवभूमि के सबसे दिव्य और प्रसिद्ध मंदिर। अगर कोई आपसे पूछे कि भारत में ऐसी कौन सी जगह है जहां हवा में भी भक्ति घुली हो, पहाड़ों की चोटियों पर भगवान बसते हों, और नदियों की कल-कल में मंत्रों की गूंज सुनाई दे – तो जवाब सिर्फ एक है – उत्तराखंड

इसे यूं ही “देवभूमि” नहीं कहते। हजारों सालों से ऋषि-मुनि, संत-महात्मा और श्रद्धालु इन हिमालयी पहाड़ों में ईश्वर की खोज में आते रहे हैं। रामायण हो या महाभारत, वेद हों या पुराण – उत्तराखंड का जिक्र हर जगह मिलता है।

लेकिन सवाल ये उठता है कि Which temple is famous in Uttarakhand? या फिर How many temples are there in Uttarakhand? तो बता दें कि उत्तराखंड में 150 से भी ज्यादा प्रमुख मंदिर हैं, जिनमें छोटा चार धाम, पंच केदार, पंच बद्री, पंच प्रयाग, शक्ति पीठ और सिद्ध पीठ जैसे पवित्र तीर्थ स्थल शामिल हैं। और अगर छोटे-बड़े सभी मंदिरों को गिना जाए तो ये संख्या हजारों में पहुंच जाती है।

तो चलिए, आज इस आर्टिकल में हम आपको उत्तराखंड के सबसे Famous Temple in Uttarakhand की पूरी जानकारी देते हैं – उनका इतिहास, भूगोल, किस देवी-देवता को समर्पित हैं, और क्यों ये मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं।

Table of Contents

1. केदारनाथ मंदिर – भगवान शिव का सबसे पवित्र धाम

अगर उत्तराखंड का सबसे प्रसिद्ध मंदिर (Famous Temple in Uttarakhand) कोई है, तो केदारनाथ उनमें सबसे ऊपर आता है।

समर्पित: भगवान शिव (ज्योतिर्लिंग)

भूगोल और स्थान: केदारनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी के तट पर, गढ़वाल हिमालय की गोद में 3,583 मीटर (लगभग 11,755 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। ऋषिकेश से इसकी दूरी लगभग 223 किलोमीटर है, और गौरीकुंड से 16 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करके यहां पहुंचा जाता है।

इतिहास: पौराणिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था, जिन्होंने महाभारत युद्ध के बाद यहां भगवान शिव की तपस्या की थी। बाद में 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनरुद्धार किया। ये मंदिर 1,000 साल से भी ज्यादा पुराना है और विशाल पत्थर की शिलाओं से बना है, जिसमें गर्भगृह और मंडप की स्थापत्य कला अद्भुत है।

लोकप्रियता: केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और छोटा चार धाम यात्रा का अभिन्न हिस्सा है। 2013 की विनाशकारी बाढ़ के बाद भी ये मंदिर अडिग रहा, जिसने लोगों की आस्था को और मजबूत किया। हर साल लाखों श्रद्धालु मई से अक्टूबर के बीच यहां दर्शन करने आते हैं।

दर्शन का समय: सुबह 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक

2. बद्रीनाथ मंदिर – भगवान विष्णु का परम धाम

जब कोई पूछता है Which is the biggest temple in Uttarakhand? तो बद्रीनाथ मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। ये न सिर्फ उत्तराखंड का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है, बल्कि भारत के चार धामों में भी सबसे महत्वपूर्ण है।

समर्पित: भगवान विष्णु (नर-नारायण अवतार)

भूगोल और स्थान: चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे, 3,133 मीटर (10,827 फीट) की ऊंचाई पर बद्रीनाथ मंदिर स्थित है। चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़ और घने जंगल इसे अत्यंत मनोरम बनाते हैं।

Badrinath Temple

इतिहास: बद्रीनाथ का उल्लेख वेदों में भी मिलता है, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाता है। माना जाता है कि 8वीं-9वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना की थी। बाद में गढ़वाल के राजाओं ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर सुंदर नक्काशी है, और इसमें गर्भ गृह, सभा मंडप और दर्शन मंडप तीन प्रमुख भाग हैं।

लोकप्रियता: बद्रीनाथ अखिल भारतीय चार धाम यात्रा और छोटा चार धाम यात्रा दोनों का हिस्सा है। वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी जीवन में कम से कम एक बार यहां दर्शन करना अपना कर्तव्य मानते हैं। मंदिर के पास तप्त कुंड (प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड) भी है, जिसमें स्नान करने से पापों का नाश होता है ऐसा माना जाता है।

दर्शन का समय: सुबह 4:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक, शाम 4:00 बजे से रात 9:00 बजे तक

बेस्ट टाइम: मई से नवंबर

3. तुंगनाथ मंदिर – दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर

तुंगनाथ की खासियत ये है कि ये दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं और आस्था भी रखते हैं, तो ये जगह आपके लिए स्वर्ग जैसी है।

समर्पित: भगवान शिव (पंच केदार में तीसरे)

भूगोल और स्थान: रुद्रप्रयाग जिले में चंद्रनाथ पर्वत पर 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। चोपता से एक छोटा ट्रेक करके यहां पहुंचा जा सकता है।

इतिहास: तुंगनाथ मंदिर भी 1,000 साल से अधिक पुराना है और इसका संबंध पांडवों से जोड़ा जाता है। महाभारत के बाद पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पंच केदार की स्थापना की, जिसमें तुंगनाथ तीसरा केदार है। यहां भगवान शिव की भुजाओं (बाहुओं) की पूजा होती है।

लोकप्रियता: तुंगनाथ पंच केदार यात्रा सर्किट का हिस्सा है। मंदिर में भगवान शिव के साथ माता पार्वती और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं। चोपता से तुंगनाथ तक का ट्रेक प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

4. गंगोत्री मंदिर – जहां से गंगा माता का अवतरण हुआ

समर्पित: देवी गंगा

भूगोल और स्थान: उत्तरकाशी जिले में भागीरथी नदी के किनारे, 3,100 मीटर की ऊंचाई पर गंगोत्री मंदिर स्थित है। ये 20 फीट ऊंचा शुभ्र सफेद मंदिर गढ़वाल के बीहड़ पहाड़ों में बसा है।

इतिहास: 18वीं शताब्दी में गोरखा जनरल अमर सिंह थापा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर में देवी गंगा की काले संगमरमर की मूर्ति स्थापित है। साथ ही, यहां एक प्राकृतिक शिवलिंग भी है जो आंशिक रूप से पानी में डूबा रहता है, जिसे भगवान शिव द्वारा गंगा को अपनी जटाओं में धारण करने का प्रतीक माना जाता है।

लोकप्रियता: गंगोत्री छोटा चार धाम यात्रा का अहम हिस्सा है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बंद रहता है, इसलिए हर साल इसके खुलने का उत्सव विशेष धूमधाम से मनाया जाता है। गंगा माता की उत्पत्ति स्थल होने के कारण इसका आध्यात्मिक महत्व अपार है।


5. यमुनोत्री मंदिर – यमुना देवी का पावन धाम

समर्पित: देवी यमुना

भूगोल और स्थान: उत्तरकाशी जिले में यमुना नदी के बाएं तट पर, 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जानकीचट्टी से 5 किलोमीटर का ट्रेक करके यहां पहुंचा जाता है।

इतिहास: वर्तमान मंदिर का निर्माण टिहरी गढ़वाल के महाराजा प्रताप शाह ने करवाया था। बाद में जयपुर की महारानी गुलेरिया ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। हालांकि ये स्थान प्राचीन काल से ही पवित्र माना जाता रहा है।

लोकप्रियता: यमुनोत्री चार धाम यात्रा सर्किट में सबसे पहला पड़ाव है। यहां तप्त कुंड (गर्म पानी का झरना) और सूर्य कुंड प्रसिद्ध हैं। श्रद्धालु सूर्य कुंड के गर्म पानी में चावल और आलू पकाकर प्रसाद के रूप में ले जाते हैं।

6. जागेश्वर धाम – उत्तराखंड का सबसे प्राचीन मंदिर समूह

अब अगर सवाल ये है कि Which is the oldest temple in Uttarakhand? तो इसका जवाब है – जागेश्वर धाम। अल्मोड़ा जिले में स्थित ये मंदिर समूह उत्तराखंड के सबसे पुराने मंदिरों में गिना जाता है।

समर्पित: भगवान शिव (ज्योतिर्लिंग)

भूगोल और स्थान: अल्मोड़ा जिले में घने देवदार के जंगलों के बीच जटा गंगा धारा के किनारे जागेश्वर धाम स्थित है।

इतिहास: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, जागेश्वर धाम के मंदिर गुप्तकाल के बाद और मध्यकाल से पहले के हैं, यानी लगभग 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच के। कुछ विशेषज्ञ इसे 2,500 साल तक पुराना मानते हैं। यहां 124 छोटे-बड़े मंदिर हैं, जिनमें महा मृत्युंजय मंदिर सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा है। इसकी दीवारों पर संस्कृत में 7वीं से 10वीं शताब्दी के शिलालेख मिलते हैं। ये मंदिर कात्यूरी और चंद राजवंशों की नागर शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना हैं।

लोकप्रियता: जागेश्वर को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और ये उत्तराखंड की दो शक्ति पीठों में से एक भी है। इतिहास प्रेमी, वास्तुकला के जानकार और प्रकृति प्रेमी – सभी के लिए ये जगह अनमोल है।

7. नीलकंठ महादेव मंदिर – जहां शिव ने विष पिया

समर्पित: भगवान शिव

भूगोल और स्थान: ऋषिकेश से लगभग 30 किलोमीटर दूर, नर-नारायण पर्वत श्रृंखलाओं के बीच, पंकजा और मधुमती नदियों के संगम पर ये मंदिर स्थित है।

इतिहास: पौराणिक कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन के दौरान “हलाहल” विष निकला, तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को पी लिया। उस विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें “नीलकंठ” कहा गया। माना जाता है कि यही वह स्थान है जहां भगवान शिव ने ये विष ग्रहण किया था।

लोकप्रियता: ये मंदिर ऋषिकेश आने वाले लगभग हर श्रद्धालु और पर्यटक की लिस्ट में होता है। महाशिवरात्रि पर यहां भव्य मेला लगता है और हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।

8. चंडी देवी और मंसा देवी मंदिर, हरिद्वार – शक्ति की आराधना

समर्पित: देवी चंडी (चंडी देवी) और देवी मंसा

भूगोल और स्थान: हरिद्वार में नील पर्वत पर चांदी देवी और बिल्वा पर्वत पर मंसा देवी का मंदिर स्थित है। दोनों मंदिरों तक रोपवे से भी पहुंचा जा सकता है।

इतिहास: चांदी देवी मंदिर का निर्माण 1929 में कश्मीर के राजा सुचत सिंह ने करवाया था, लेकिन कहा जाता है कि यहां मूल मूर्ति की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी। मंसा देवी मंदिर भी प्राचीन काल से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है।

लोकप्रियता: चांदी देवी मंदिर को उत्तराखंड का सबसे ज्यादा दर्शन किया जाने वाला मंदिर माना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंसा देवी को मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।

9. कटारमल सूर्य मंदिर – भारत का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सूर्य मंदिर

समर्पित: भगवान सूर्य (वृद्धादित्य – “बूढ़े सूर्य देव”)

भूगोल और स्थान: अल्मोड़ा से 19 किलोमीटर दूर, 2,116 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

इतिहास: 9वीं शताब्दी में कत्यूरी राजवंश के राजा कटारमल्ल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। कोणार्क सूर्य मंदिर के बाद ये भारत का दूसरा सबसे प्रमुख सूर्य मंदिर माना जाता है। मंदिर की खासियत ये है कि इसका मुख पूर्व दिशा की ओर है, ताकि सूर्य की पहली किरणें सीधे गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग पर पड़ें। मंदिर के दरवाजों और पैनलों पर उत्कृष्ट लकड़ी की नक्काशी है।

लोकप्रियता: वास्तुकला प्रेमियों के लिए ये मंदिर किसी खजाने से कम नहीं है। ASI द्वारा संरक्षित ये मंदिर अपनी अनूठी शिल्पकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

10. बालेश्वर मंदिर, चंपावत – चंद राजवंश की धरोहर

समर्पित: भगवान शिव (बालेश्वर)

भूगोल और स्थान: चंपावत शहर में स्थित है।

इतिहास: बालेश्वर मंदिर का निर्माण 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच चंद राजवंश के शासकों ने करवाया था। ये उत्तराखंड के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय शैली से प्रभावित है, जिसमें पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी देखते ही बनती है। 1952 से ये मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है और इसे राष्ट्रीय धरोहर स्मारक का दर्जा प्राप्त है।

मंदिर परिसर में मुख्य बालेश्वर मंदिर के अलावा दो और मंदिर हैं – एक चंपावती दुर्गा को और दूसरा रत्नेश्वर को समर्पित।

लोकप्रियता: महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वालों के लिए ये जगह अवश्य देखने योग्य है।

11. धारी देवी मंदिर – रूप बदलने वाली देवी

समर्पित: देवी धारी (माता काली/दुर्गा का रूप)

भूगोल और स्थान: श्रीनगर पौड़ी के कालियासौड़ में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है।

इतिहास: धारी देवी मंदिर 108 शक्ति पीठों में से एक है। इस मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात ये है कि देवी की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है – सुबह एक बालिका, दोपहर में युवती, और शाम को वृद्ध महिला का रूप। 2013 की केदारनाथ त्रासदी को भी कई लोग धारी देवी मंदिर के विस्थापन से जोड़ते हैं।

लोकप्रियता: रहस्य और आस्था का अनूठा मिश्रण इस मंदिर को उत्तराखंड के सबसे चर्चित मंदिरों में शामिल करता है।


12. पूर्णागिरि मंदिर – 108 सिद्ध पीठों में से एक

समर्पित: माता पूर्णागिरि (देवी शक्ति)

भूगोल और स्थान: चंपावत जिले में टनकपुर के पास अन्नपूर्णा पर्वत शिखर पर स्थित है।

इतिहास: पूर्णागिरि 108 सिद्ध पीठों में से एक मानी जाती है। ये मंदिर सती की कथा से जुड़ा है – जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए, तब उनकी नाभि यहां गिरी थी। ये उत्तराखंड के सबसे प्राचीन और पवित्र शक्ति स्थलों में से एक है।

लोकप्रियता: चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) के दौरान यहां देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर से नेपाल के गांवों और टनकपुर शहर का मनमोहक दृश्य दिखता है।

Pro Tips – उत्तराखंड मंदिर यात्रा के लिए जरूरी सुझाव

यात्रा का सही समय: ऊंचाई पर स्थित मंदिर (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, तुंगनाथ) मई से अक्टूबर-नवंबर तक खुले रहते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद हो जाते हैं। नीचे के मंदिर (हरिद्वार, ऋषिकेश, जागेश्वर) साल भर खुले रहते हैं।

स्वास्थ्य सावधानी: ऊंचाई वाले मंदिरों में ऑक्सीजन कम होती है। अगर आपको सांस या हृदय संबंधी कोई समस्या है तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें। अपने साथ गर्म कपड़े, रेनकोट और बेसिक दवाइयां जरूर रखें।

चार धाम यात्रा रजिस्ट्रेशन: छोटा चार धाम यात्रा के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और बायोमेट्रिक पंजीकरण अनिवार्य है।

ट्रेकिंग की तैयारी: केदारनाथ (16 किमी), तुंगनाथ और यमुनोत्री (5 किमी) जैसे मंदिरों तक पैदल ट्रेक करना होता है। अच्छे ट्रेकिंग शूज़ और फिटनेस जरूरी है।

स्थानीय संस्कृति का सम्मान: मंदिर परिसर में शालीन वस्त्र पहनें, फोटोग्राफी के नियमों का पालन करें, और स्थानीय परंपराओं का आदर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q1: Which temple is famous in Uttarakhand? उत्तराखंड में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन सबसे ज्यादा प्रसिद्ध केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर हैं। केदारनाथ भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है, जबकि बद्रीनाथ भगवान विष्णु को समर्पित है। इसके अलावा गंगोत्री, यमुनोत्री, तुंगनाथ, जागेश्वर और नीलकंठ महादेव भी अत्यंत प्रसिद्ध हैं।

Q2: Which is the biggest temple in Uttarakhand? उत्तराखंड का सबसे बड़ा मंदिर बद्रीनाथ मंदिर माना जाता है, जो चमोली जिले में 3,133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये भारत के चार धामों में सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है और धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व अपार है।

Q3: How many temples are there in Uttarakhand? उत्तराखंड में 150 से अधिक प्रमुख मंदिर हैं, जिनमें छोटा चार धाम, पंच केदार, पंच बद्री, पंच प्रयाग, शक्ति पीठ और सिद्ध पीठ शामिल हैं। अगर छोटे-बड़े सभी मंदिरों को मिला दिया जाए तो ये संख्या हजारों में पहुंचती है। अकेले जागेश्वर धाम में ही 124 मंदिर हैं।

Q4: Which is the oldest temple in Uttarakhand? उत्तराखंड का सबसे पुराना मंदिर समूह जागेश्वर धाम है, जो अल्मोड़ा जिले में स्थित है। ASI के अनुसार ये मंदिर 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच के हैं। इसके अलावा कसार देवी मंदिर (अल्मोड़ा) की संरचना दूसरी शताब्दी ईस्वी की मानी जाती है, जो इसे और भी प्राचीन बनाती है।

Q5: उत्तराखंड को देवभूमि क्यों कहा जाता है? उत्तराखंड को देवभूमि इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां अनगिनत प्राचीन मंदिर, तीर्थ स्थल और आश्रम हैं। हजारों सालों से ऋषि-मुनि हिमालय की इन पहाड़ियों में तपस्या करते आए हैं। रामायण, महाभारत और पुराणों में इस क्षेत्र का बार-बार उल्लेख मिलता है। हरिद्वार को भारत की सात सबसे पवित्र नगरियों (सप्त पुरी) में गिना जाता है।

Q6: क्या उत्तराखंड के सभी मंदिर साल भर खुले रहते हैं? नहीं। कम ऊंचाई पर स्थित मंदिर (हरिद्वार, ऋषिकेश, अल्मोड़ा क्षेत्र) साल भर खुले रहते हैं। लेकिन अधिक ऊंचाई पर स्थित हिमालयी मंदिर जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और तुंगनाथ सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद हो जाते हैं और गर्मियों में पुनः खोले जाते हैं।

निष्कर्ष – देवभूमि की पुकार

उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि एक अनुभव है – जहां हर पत्थर में इतिहास है, हर नदी में पवित्रता है, और हर पहाड़ की चोटी पर भगवान का वास है। चाहे आप आस्थावान हों या इतिहास प्रेमी, प्रकृति प्रेमी हों या एडवेंचर के दीवाने – Famous Temple in Uttarakhand की ये सूची आपकी अगली यात्रा को अविस्मरणीय बना सकती है।

केदारनाथ की शिव भक्ति हो, बद्रीनाथ की वैष्णव आस्था, जागेश्वर की प्राचीनता, या तुंगनाथ की ऊंचाई – हर मंदिर अपनी एक अलग कहानी कहता है।

तो इस बार जब भी आप उत्तराखंड जाने का प्लान बनाएं, इन मंदिरों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। क्योंकि देवभूमि बुला रही है, और जब देवता बुलाएं तो जाना तो बनता है!

आपको ये आर्टिकल कैसा लगा? कमेंट में जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें जो उत्तराखंड यात्रा का प्लान बना रहे हैं!

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